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ये डिब्‍बा क्‍या होता है शरद यादव जी!

Posted On: 28 Aug, 2011 Others में

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ए‍क सवाल है श्री शरद यादव जी से।  जदयू प्रमुख शरद यादव जी से। ये डिब्‍बा क्‍या होता है शरद जी? जिसका जिक्र आपने शनिवार को लोकसभा में ए‍ेतिहासिक बहस के दौरान किया। जिस पर माननीय सांसदों ने ठहाकों के साथ निर्धारित वक्‍त से भी ज्‍यादा आपको बोलने दिया। जबकि देशहित के ज्‍यादातर गंभीर मसलों पर बहस के दौरान वे शोर मचाते हुए उठ खड़े होते हैं। संसद की कार्यवाही का बहिष्‍कार तक कर जाते हैं। लेकिन वे अपने लिए निर्धारित समय भी आपके नाम करने को तैयार थे।  वैसे, आपने जिसे डिब्‍बा बताया, कहीं वह ऐसी कोई संस्‍था तो नहीं, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ कहा जाता है। 
 अगर मेरा अंदाजा वाकई सही है तो समझ में नहीं आता कि आपके बयान को देश के लिए सौभाग्‍य कहूं या फिर दुर्भाग्‍य। ओमपुरी तो अन्‍ना के मंच पर नशे में बहक गए। लेकिन जहां तक  आप दावा करते हैं कि व्‍यसनों से दूर हैं। फिर आप कैसे बहक गए ? लोकतंत्र के आंगन में बैठकर आप कैसे उसी के चौथे स्‍तंभ को कोस गए। अगर जनता की आवाज को बुलंद करना, डिब्‍बागिरी है तो यह नाजायज कहां से है? आप ही क्‍यों, आपके पुराने मित्र लालू प्रसाद जी भी बददुआ देते नजर आए कि रिपोर्टर रिपोर्टिंग करना भूल जाएंगे। मीठा-मीठा हप्‍प और कड़वा-कड़वा थू। आपके मन की बात न करें तो डिब्‍बा है और आपके मन की बात करे तो मीडिया? यह कौन सा मानदंड है ? खुद को किसानों-मजदूरों का मसीहा कहने वाले शरद जी आपकी शिकायत जायज है। आपने लोकसभा को बताया कि चारों तरफ बाढ़ से तबाही मची हुई है। मीडिया उसे कवरेज नहीं दे रहा है। लेकिन एक बात अब आप भी बता दीजिए। आपने अपने संसदीय क्षेत्र मधेपुरा (बिहार) के किन-किन बाढ प्रभावित क्षेत्रों में घुटने-कमरभर पानी में जाकर किसानों-गरीबों का हाल जाना ? राहत और बचाव कार्य के लिए आपने अपनी सांसद निधि से कितने लाख-करोड़ की धनराशि आवंटित की। आप कहते हैं आठ-नौ साल से कहीं नहीं जाते। मत जाइए। आपने तो अपना वक्‍त काफी हद तक गुजार लिया। सचिन पायलट और जितिन प्रसाद जैसे होनहारों को किसी बहस-मु‍बाहिसें में जाने से क्‍यों रोक रहे हैं। क्‍यों उनकी टांग खींच रहे है। आपने अपने वक्‍तव्‍य में कौन सी ऐसी नजीर पेश की, जिसे संसद में बैठे युवा तुर्क आत्‍मसात करते। मेरी तो समझ में यही आ रहा है कि आपने लोकसभा का कीमती वक्‍त अपनी हंसी-ठिठोली में बरबाद किया। किरण बेदी ने अन्‍ना के मंच पर ओढनी ओढ ली तो आपको नागवार गुजरा। आपने पगडी उछालना अपनी आदत बताकर एक तरह से धमकाने का काम किया। यह कौन सी संतई है। आप का संसदीय क्षेत्र जिस सूबे में आता है, वहां शादी-विवाह और पार्टियों में न जाने कितनी नर्तकियां ओढनी ओढकर नाचती हैं, आपको उससे कोई गुरेज क्‍यों नहीं हुआ। क्‍या वे औरत नहीं होतीं। सालों से चली आ रही शायद इन्‍हीं मनमानियों की लंबी होती फेहरिस्‍त को देखकर अन्‍ना हजारे जैसे बुजुर्ग को आत्‍मघाती हथियार अपनाना पड़ा। बारह दिनों तक भूखे रहना पड़ा। अगर मनमानियां नहीं थमीं तो ऐसे कई मौके देखने पडेंगे संसद को। आए दिन कोई न कोई अन्‍ना अनशन पर बैठा होगा। आप उसे मनाने के लिए विनती करते नजर आएंगे।
 
 
 

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882 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Will के द्वारा
July 12, 2016

Hey Chuck, did your 3 year old attempt to do a split foowelld by a slip & slide grind on the floor while whipping her hair back & forth too?

Char के द्वारा
July 12, 2016

That saves me. Thanks for being so selnebsi!

राजू मिश्र के द्वारा
August 31, 2011

कहो चाहे जो टाइगर बाबू, शरद यादव भी तडि़यल हैं पक्‍के। डबल बीवी रखने वाले लोग बहुत जल्‍दी बहकते हैं, चाहे वह ओम पुरी हो या फिर शरद यादव। असली पियक्‍कड़ कभी नहीं बहकता। शरद यादव बड़े तीसमार खां लीडर बनते हैं, लेकिन अपने बाबा भोंडसीवाले का कोई जोड़ नहीं था। चीयर्स…जय हो।

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    बातों बातों में अक्‍सर बहक जाना शरद यादव जी की आदत में शुमार है।

    Tess के द्वारा
    July 12, 2016

    10uRi/20120aelsonL/1z, infelizmente um mês é muito pouco. Como diz o ditado porpular: ‘quer conhecer uma pessoa? coma um quilo de sal com ela’. Seria mais fácil perguntar à sua atendente ou à sua secretária. Talvez, se elas estiverem com você há mais tempo elas possam confirmar ou desmentir a sua afirmação.Mas é bom que existam dentistas certinhos, isso há uma esperança para a classe. Parabéns!  

Munish Dixit के द्वारा
August 30, 2011

सर, आप ने तो एक बार में ही बहुत कुछ कह दिया।

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    धन्‍यवाद मुनीष जी।

    Lark के द्वारा
    July 12, 2016

    Shoot, who would have thgohut that it was that easy?

Santosh Kumar के द्वारा
August 29, 2011

दादा बहुत सटीक सवाल ,..साधुवाद

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    कीमती वक्‍त निकाल कर ब्‍लॉग तक जाने के लिए धन्‍यवाद। साधुवाद।

manish के द्वारा
August 28, 2011

बिल्कुल सही और बहुत अच्छा लिखा दादा….कमाल

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया मनीष बाबू।

Abhishek के द्वारा
August 28, 2011

अन्ना जी के मंच पर सांसदों के बारे में जो ओंम पूरी साहब ने बोला उसमे कुछ न कुछ सचाई थी… वैसे ये मई नहीं बोल रहा हु आपका ब्लॉग बोल रहा है.. कभी कभी पिने के बाद इन्सान सच बोलने लगता है…. और बिना पिए आप खुद समझ लीजिये..

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    सत्‍यम ब्रुयात, प्रियम ब्रुयात। न ब्रुयात सत्‍यम अप्रियम।

    Indy के द्वारा
    July 12, 2016

    En traitant l’Occident de barbare, ce Mohamed Afifi Mattar ne fait que conforter la thèse du « Choc des cisr.isationv »lPouiquoi la grande civilisation arabo-musulmane (de l’Iran au Maroc) s’est-elle écroulée au XVème siècle pour ne pas encore renaître en ce début de XXIème siècle, malgré les milliers de milliards du pétrole ?

sanjay rustagi के द्वारा
August 28, 2011

हकीकत लिखी है बडे भाई

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    सच का दामन न छूटे कभी।

veena srivastava के द्वारा
August 28, 2011

यह हमारे देश का दुर्भ्भाग्य ही है . या कहें की बहुत से [ सभी नहीं] नेताओं का इतना पतन होगया है की – VOTE ..ताक़त और कुर्सी के दीवाने होकर यह देश और जनता के दुःख-दर्द भूल जाते हैं .. आज ज़रूरत है इन्हें भी अपना कर्तव्य याद करने की . अन्यथा आराम करें और देश की सत्ता से दूर रहें . देश माँ है जनता के सेवक हैं तो ठीक वर्ना कोई ज़रूरत नहीं .. अरे बहुत से प्रतिभाशाली लोग हैं जो देश और समाज की सेवा करने में सक्षम हैं –..उन्हें आने दीजिये आगे .!!!!………. -!!!!!!!!!!!- परिवर्तन चाहिए देश की जनता को ……

    pramod के द्वारा
    August 28, 2011

    आदरणीया वीणा जी,  नेता हम और आप भेजेंते हैं। नेता का चयन जनता करती है। नेता जनता का प्रतिनिधित्व करते है। अधिकांश नेता के पतन  की वजह निशि्चत तौर पर अधिकांश जनता के चयन से जुड़ा है।  अधिकांश जनता के पतन के सवाल पर हमें और आप को  गंभीर होने की जरूरत है और नेताओं से स्थान खाली करने  की मांग से भला होने वाला नहीं है। हमें या जनता के  हितैषियों को आगे बढ़कर संषर्ष करने की जरूरत है।   प्रमोद कुमार चौबे  ओबरा सोनभद्र उत्तर प्रदेश 

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    परिवर्तन जीवंतता की निशानी है। यह चक्र चलते रहना चाहिए।

mahesh sharma के द्वारा
August 28, 2011

बेहद संतुलित और सधी प्रतिक्रिया दादा, जो देश और पूरी व्यवस्था को अपने डंडे से ही हांकने के  लिए बेताब रहते हैं। सादर बधाई, लेकिन मीडिया को लेकर उठने शुरू हुई ऐसी टिप्पणियां कहीं न  कहीं हमें आपको आत्मचिंतन के लिए भी सोचने के लिए बाध्य करती हैं।

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    म‍हेश जी, यह ब्‍लॉग भी तो आत्‍मचिंतन की ही देन है।

    Delonte के द्वारा
    July 12, 2016

    That’s an apt answer to an insttereing question

    Ivalene के द्वारा
    July 12, 2016

    This place is a good place to put ur feet back have a drink and do some Karaoke whether or not the bartenders are underage. there not drinking there working and there not breaking any rules this is why cops have gone there have checked id’s and the bartenders are still the…e..r….

दीपक पाण्डेय के द्वारा
August 28, 2011

बहुत बढ़िया सर जी .

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    September 3, 2011

    शुक्रिया दीपक जी

    Leatrice के द्वारा
    July 12, 2016

    Great inghtis. Relieved I’m on the same side as you.


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