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हमरे राहुल भइया भी न...गजबे हैं!

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हमरे राहुल भइया का भी जवाब नहीं हैं। गज्‍ज्‍ज्‍जब। सुर्खियों में कैसे बने रहा जाता है, कोई उनसे सीखे। जहां भी जाते हैं रहस्‍य और रोमांच पैदा कर देते हैं। जिसे छू देते हैं, उसके भाग खुल जाते हैं। बिल्‍कुल पारस पत्‍थर की तरह। अब समोसा को ही लीजिए। अपने हिंदुस्‍तान में न जाने कितने करोड़ समोसा लोग रोज पूरी खामोशी के साथ हजम कर जाते हैं। लेकिन जिस दिन राहुल भइया लालगंज, डलमऊ या जगदीशपुर में सड़क के किनारे किसी दुकान पर समोसे को छू लेते हैं, हलक से नीचे उतरने से पहले समोसा ब्रेकिंग न्‍यूज बन जाता है। न्‍यूज चैनलों पर छा जाता है। अखबारों की सुर्खियों में शुमार हो जाता है–राहुल जी ने समोसा खाया।राहुल जी ने समोसा खाया। राहुल जी ने समोसा खाया। वह कृपालु भी कम नहीं। कभी अंग्रेजी बाबू मिलीबैंड के साथ पधार कर किसी गांव सिमरा में किसी शिवकुमारी की कुटिया को कृतार्थ कर देते है, बैठकर ख्‍ाटिया-बिछौना को धन्‍य कर देते हैं। पढ़-सुनकर लगता है, जैसे रामलीला में सबरी का प्रसंग चल रहा हो। कभी बिल गेट्स जैसे धनपति की आंखों से रायबरेली-अमेठी के गंवई लोगों को सिलीकॉन वैली घुमाने का सप‍ना दिखाते हैं। रह-रह कर बहनजी की उत्‍तर प्रदेश पुलिस के सुरक्षा घेरे को अंगूठा दिखाने वाले राहुल भइया, अचानक अलीगढ़ में आंदोलित किसानों से मिलने पहुंच जाते हैं। मगर चोरी-चोरी, चुपके-चुपके। चोरी-चुपके के पीछे का रहस्‍य तो राहुल भैया ही बताएंगे कि इस तरह कोई सस्‍पेंस क्रिएट करना था या फिर सिक्‍योरिटी कंसर्न। लेकिन उन्‍हें तो छा जाना था और छा गए सुर्खियों में। हजारों-लाखों लोग मुंबई की लोकल या फिर दिल्‍ली की मेट्रो में रोजै सफर करते हैं। तरह-तरह की धक्‍काधुक्‍की झेलते हैं। लेकिन न तो कैमरे चमकते है और ना ही खबर बनतीं। लेकिन जब राहुल भइया इनमें सफर करते हैं तो सुर्खियां उमड़ने लगती हैं। एक सवाल के चक्‍कर में हर बार घनचक्‍कर बना रहता हूं कि जब सब कुछ गोपनीय ही होता है, तो कुछ ही मिनटों में ही खबरों की बाढ़ कैसे आ जाती है। बुंदेलखंड के लिए पैकेज की मांग कर कर उत्‍तर प्रदेश सरकार थक जाती है। लेकिन जिस दिन राहुल भइया बुंदेलखंड के लिए पैकेज की मांग उठाते हैं, अपने अर्थशास्‍त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अचानक उदार हो जाते हैं। पैकेज की घोषणा भी हो जाती है। यह तो राहुल भइया के करिश्‍माई व्‍यक्तित्‍व का ही कमाल कहा जाएगा।

बिहार में चुनाव हो रहे हों और राहुल भइया के मन में पुरबियों के लिए अचानक दर्द न उमडे़ तो फिर प्‍यार ही कैसा। अक्‍सर चार्टर्ड विमान से चलने वाले राहुल भइया 18 अक्‍टूबर को गोरखपुर में मुंबई जाने वाली एक ट्रेन में बैठ गए। ताज्‍जुब यह कि एसी नहीं, स्‍लीपर कोच में। यह दीगर बात थी कि दस-बारह लोगों का अमला साथ चल रहा था। सुनने में आया है कि पूर्वांचल और बिहार के लोगों का दर्द समझने के लिए उन्‍होंने आम आदमी की तरह सफ‍र किया। लेकिन यह भी बताया जा रहा है कि उनका और उनके साथ चलने वाले लोगों का का रिजर्वेशन रेलवे मुख्‍यालय से कन्‍फर्म कराया गया था। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि राहुल भइया कुशीनगर गए थे अपना भाग्‍य पढ़वाने। वहां कोई कामाख्‍या प्रकाश जी है, रावण्‍ा संहिता के प्रकांड विद्वान हैं। यह मामला हाइप न पकड़ ले, पर्दा डालने के लिए राहुल भइया ट्रेन में बैठ गए। वजह-मंशा चाहे जो रही हो, राहुल भइया एक बार फिर सुर्खियों में। वैसे राहुल भइया के इस सफर को लेकर जो एक बात मेरे मन में कुलबुला रही है, वह य‍ह कि जब दीपावली और छठ करीब सरक रहे हों तो गोरखपुर से मुंबई जाने वाली ट्रेन के सफर में दुखदर्द का अहसास कैसा, वह भी स्‍पेशल ट्रेन, जिसके बारे में मुसाफिर भाई जानते भी कम हैं। फांका ही जाती है। दुख-दर्द जानना ही था तो राहुल भइया को बांबे वीटी से गोरखपुर के लिए सफर करना चाहिए था। अब भी मौका है। एक-दो दिन बाद दिल्‍ली से बिहार जाने वाली किसी भी ट्रेन में राहुल भइया अगर चढ़ने की कोशिश भी कर गए तो यकीन आ जाएगा कि वह वाकई दु:ख दर्द समझने की चाह रखते हैं। भीड़ का आलम यह होता है कि क्या पता कब प्‍लेटफार्म पर भगदड़ मच जाए और दो-चार-दस लोगों को सफेद कपड़े लिपटना पड़े, कोई नहीं जानता। जनरल तो जनरल, स्‍लीपर बोगी में भी लात रखने की जगह नहीं होती। वैसे मैं भी कुछ कम भूलक्‍कड़ नहीं। इतना सब लिख गया, लेकिन अपने राहुल भइया का पूरा परिचय तो कराया ही नहीं। जैसे पूरी रामायण हो गई और फिर भी सवाल खड़ा था-रामजी कौन हैं। दरअसल मैं अपने उस राहुल भइया की बात कर रहा था जो कांग्रेस के युवराज है। भाग्‍य बचवाकर आएं हैं तो लगता है कि शुभ मुहूर्त दिखवाने गए थे। अचानक यहां-वहां पहुंचकर सबको चौका देने वाले हमरे राहुल भइया जल्‍दी ही किसी दिन प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंचकर देश को चौकाने वाले हैं शायद!! मेरी भी शुभकामना उनके साथ।।जय हो।।

जाहिर है इतना सब पढ़ने में वक्‍त और दिमाग काफी खर्च हुआ होगा। इसलिए अब एक दिमागी कसरत कीजिए। गणित का एक सवाल हल करिए ना जरा—- -मान लीजिए कि राहुल भइया, ब्रितानी विदेश सचिव मिलीबैंड और अमेरिकी धनकुबेर बिलगेट्स अचानक जगदीशपुर में सड़क के किनारे एक दुकान पर समोसा और जलेबी खाने बैठ गए -दुकानदार ने बिल बनाया 75 रुपये का -तीनों ने अपनी अंटी से 25-25 रुपये निकाल कर दुकानदार के छोरे को थमा दिए -75 रुपये लेकर छोरा गया दुकानदार के पास -दुकानदार ने सोचा, इतने हाईप्रोफाइल लोग आए है, चलो कुछ डिस्‍काउंट दे देते हैं। उसने पांच रुपये लौटा दिए -पांच रुपये में से छोरे ने दो रुपये अपनी जेब में समेट दिए। एक-एक रुपये तीनों को वापस कर दिया -इस तरह हरेक के हिस्‍से में बिल आया 24-24 रुपये का -अब 24+24+24=72 रुपये हुए। इस 72 में जिस दो रुपये को वेटर ने रख लिए थे, उसको भी जोड़ दें तो हो जाते हैं=74 रुपये -फिर एक रुपया कहां गया ?

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4427 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mohit parashar के द्वारा
January 30, 2011

दादा, बधाई हो। आप तो नहीं दिखे, लेकिन आपका चेहरा (फोटो में) बहुत दिन बाद दिखाई दिया। वो भी एक खुशखबरी के साथ।

preetam thakur के द्वारा
January 27, 2011

कोटिश बधाई MMS जी |

    Staysha के द्वारा
    July 12, 2016

    What I find so ineitesrtng is you could never find this anywhere else.

ishander sharma के द्वारा
January 25, 2011

madan ji, aapko jagran contest jeetne ke liye bahut bahut badhai………

rajeev dubey के द्वारा
January 24, 2011

मदन मोहन जी, संपादकीय ब्लॉग स्टार कॉंटेस्ट पुरूस्कार मिलने पर बधाई और शुभकामनाएं !

rajeev dubey के द्वारा
January 24, 2011

मदन मोहन जी, संपादकीय ब्लॉग स्टार कॉंटेस्ट पुरूस्कार मिलाने पर बधाई और शुभकामनाएं !

    Jazlyn के द्वारा
    July 12, 2016

    At last! Someone with real exsetripe gives us the answer. Thanks!

rddixit के द्वारा
January 22, 2011

प्रिय महोदय, आपको हार्दिक बधाई।

    Connie के द्वारा
    July 12, 2016

    Great common sense here. Wish I’d thoghut of that.

R K KHURANA के द्वारा
January 21, 2011

प्रिय मदन मोहन जी, जागरण द्वारा आपको द्वितीय पुरस्कार की बहुत बहुत बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    Randhil के द्वारा
    July 12, 2016

    December 28: winner #2 is Sara with the ! Congrats and stay tuned for prize info. Also, I’m in a generous mood, so if you’ve been dicartsted by the holiday season you can continue to enter until the last name is drawn (the earlier you enter the better your odds of winning). 10 more draws to go …

Doctor Jyot के द्वारा
January 3, 2011

nice one. aaap RAhul Gandhi, BHAIYA naba denge. after decades congress will have Nehru parivar, Gandhi parivar and then BHAIYA parivar… maths example was too good.

    Star के द्वारा
    July 12, 2016

    Rather cool blog yo#3u&9;ve got here. Thanx for it. I like such themes and anything that is connected to this matter. I would like to read more on that blog soon.Bella Kuree

Rahul के द्वारा
November 12, 2010

madan bhaiya , batutaiy achchha blog likh rahen hain charaiveti…. aur han ek rupaiya kahin kam nahi hua hai. bhai 75 me 5 nikale bacha 70 . sabke hisse aya 33 rupiya aur 33 paisa . hamare rahul bhaiya paye 33 rupiya aur 34 paisa(hamara desh garib hai na….) kul hua 70 rupiya. 1-1 rupiya vapas hua ho gaye 73 aur 2 rupiya chhore ke paas ho gaye na 75 . bhaiya samsya ka samadhan nikalne ke liye samsya ke pichhe jana padta hai na. aage se dekhane pe samsya jas ka tas rahta hai… layiye 1 rupiya dijiye hame…….

    Rahul के द्वारा
    November 12, 2010

    33 ki jagah 23 hai

    Rahul के द्वारा
    November 12, 2010

    madan bhaiya , batutaiy achchha blog likh rahen hain charaiveti…. aur han ek rupaiya kahin kam nahi hua hai. bhai 75 me 5 nikale bacha 70 . sabke hisse aya 23 rupiya aur 33 paisa . hamare rahul bhaiya paye 23 rupiya aur 34 paisa(hamara desh garib hai na….) kul hua 70 rupiya. 1-1 rupiya vapas hua ho gaye 73 aur 2 rupiya chhore ke paas ho gaye na 75 . bhaiya samsya ka samadhan nikalne ke liye samsya ke pichhe jana padta hai na. aage se dekhane pe samsya jas ka tas rahta hai… layiye 1 rupiya dijiye hame

    डॉ उपेंद्र के द्वारा
    January 27, 2011

    आप मदन भी हो और मोहन भी। अब तो मोह लिया सारा ब्लागिंग संसार। बधाई। दम बनाए रहो, ब्लागिंग बढाए रहो।

Ghanshyam Maurya के द्वारा
November 11, 2010

वाह, क्या लेख लिखा है आपने राहुल के आम जन के प्रति प्रेम प्रदर्शन पर. यह प्रेम प्रदर्शन असली है या नकली यह तो राहुल ही बता सकते हैं.

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    November 14, 2010

    ghanshyam ji..rajneta ka prem janta se jiyada koi nahi janta. jai ho.

    Karess के द्वारा
    July 12, 2016

    Why thank you, I do like to think my facial hair adds a touch of vagrance to my mug.I can’t believe you remembered that little tidbit, Megan. The sad part is, it’s frg2ign&#8i17; true. and are actually bands, and I actually have a couple of their albums. How sad is that? :p

Mohammad.Khalid.Khan के द्वारा
November 10, 2010

हमने कहा था ‘जख्म पर मरहम लगा दो’ उन्होंने नमक छिड़क दिया। पीड़ा से हम कराहते रहे उन्होंने कहा ‘कुछ जोर से कराहो ताकि हम मरहम लगाकर जमाने को बता सकें कि हमने किसी का दर्द कम किया’। ———— नजारे तो इस दुनियां में बहुत हैं मगर लोगों को बस दंगल ही भाता । अपने मंगल की बजाय दूसरे के अमंगल पर मजा आता। जिंदगी खेल है नजरिये का जैसी नजर वैसा ही जमाना हो जाता। तारीफ के लिये कौन करे इंसानों का भला शिकायत के लिये मजबूर करने वालों का नाम अखबार की सुर्खियों में ही नजर आता। मदन जी,बेहद खुबसूरत कटाछ,शानदार लेख पर बधाईयां

    Louise के द्वारा
    July 12, 2016

    Hats off to whoeevr wrote this up and posted it.

atharvavedamanoj के द्वारा
November 4, 2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||…………………………….मनोज कुमार सिंह ”मयंक” आदरणीय मदन जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    November 4, 2010

    जय हो मनोज जी।

    dinesh sharma के द्वारा
    January 25, 2011

    मनोज जी, आपकी कविता शानदार है. मेरे पास भावनाएं व्यक्त करने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं. पुनः बधाई.

Brijesh के द्वारा
November 4, 2010

राहुल जो कर रहे हैं वहीं बबुआ लोगों को सुहाता है, भइया यह सब करने के लिए भी न जाने कितने लोग स्क्रिप्ट तैयार करते होंगे। अब हम आप जैसे कुछ लोगों को तो खुजली है, जहां नजर जाएगी खुजाने लगेगें। पर बहुत से लोगों को इसमें बड़ा मजा आता है। बबुआ महान लगता है। कम उमर में ही जय प्रकाश नरायण दिखता है। अच्छा है।

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    November 4, 2010

    बृजेश जी, बबुआ दिखे भले ही जेपी जैसे, लेकिन उनके जैसा त्‍याग इनके वश की बात नहीं।

    Mohammad.Khalid.Khan के द्वारा
    November 10, 2010

    सबको रोटी दिलाने का वादा कर वह शिखर पर चढ़ जाते हैं, जब चलाना है ज़माना, जारी रखते हैं अपना कमाना, फिर खाली समय खेल तमाशों में बिताते हैं, फरिश्तों की तरह देकर बयान अपने जश्न में ही दुःखी लोगों को खुशियां मनाना सिखाते हैं, खाली पेट तरसते रहें रोटी को फिर भी वह बादशाहों की सूची में वह अपना नाम लिखाते हैं।

pradeep agnihotri के द्वारा
November 4, 2010

राहुल गांधी के नरम पैरों को सख्त जमीन पर चलने की आदत नहीं है, वह खरामा-खरामा चलकर पदचिह्न छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश कामयाब हो रही है या नहीं, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन उत्साही मीडिया उन्हें फिलहाल सिर-आंखों पर बैठाए हुए है।

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    November 4, 2010

    जनता अब समझदार हो गई है, नौटंकी के भुलावे में नहीं आने वाली।

    Romby के द्वारा
    July 12, 2016

    Såklart du gjorde rätt i att tröstfika. Det får man absolut göra!! Trist med ängaindrrna på jobbet, betyder ju mkt vilka man arbetar med. Kram på dig!

kailashpati mishra के द्वारा
November 3, 2010

बहुत निमन राऊ लिखने बनी एकरा जरी राखी एक दिन इ साहित्य क अनमोल धरहोर के रूप में जानल जयेत. राहुल बाबा टी युबराज बानी चाटुकार मीडिया के लिएय तो राहुल का हर शब्द ब्रेअकींग न्यूज़ होता है.

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    November 3, 2010

    कैलास बाबू, हर जगह भेड़चाल है। अंधेर है। एक ने ब्रेकिंग न्‍यूज दिया तो दूसरे को भी देना ही होता है। चैनल की दुनिया इसकी ज्‍यादा शिकार है।

    Molly के द्वारा
    July 12, 2016

    Inelntigelce and simplicity – easy to understand how you think.

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 3, 2010

प्रिय श्री मदन मोहन सिंह जी, राहुल भइय्रया तो गजब के हैं ही । मजदूरों के साथ खाली टोकरी उठा कर फोटो खिचवातें हैं । गरीब की रोटी का एक टूकड़ा खा कर दूर कहीं थूक आते हैं । अब ट्रेन में सफर का डंका बजवाते हैं । लेकिन समझ नहीं आता ये मीडिया वालें जानते बूझते भी क्‍यों साथ निभातें हैं । खैर आपनें भी गजब की पोल खोली है । धनतेरस व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं अरविन्‍द पारीक

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    November 3, 2010

    पारीक साहब, हर वक्‍त दर्शकों के सामने तो कुछ न कुछ परोसाना ही है। न्‍यूज नहीं तो समोसा ही सही।

murari sharan के द्वारा
November 2, 2010

भाई साहब, बेहतरीन। राहुल जैसे युवराजों के स्वांग से अभिभूत होने की हमारी पुरानी परंपरा है। मुरारी

    madan mohan singh के द्वारा
    November 3, 2010

    मुरारी जी, देश-काल के हिसाब से परंपराएं बदलनी चाहिए, वर्ना लोग उसे रूढीवाद की संज्ञा देते है।

धर्मेंद्र त्रिपाठी के द्वारा
November 2, 2010

राहुल भईया का यह सुहाना सफर यूं ही चलता रहे और आपका ब्लाग भी। इसके लिए मदन भाई वो बचे हुए एक रुपए हमे देना न भूलिएगा।

    madan mohan singh के द्वारा
    November 3, 2010

    धर्मेंद्र भइया, जो खोज निकालेगा रुपया उसी का।

devendra के द्वारा
November 2, 2010

बढ़िया है, राहुल कथा तो गज्‍ज्‍ज्‍जब है भइया…. राजा वोट मांगे नौटंकी दिखाय के…. पहेली ने तो घनचक्कर बना दिया….

    madan mohan singh के द्वारा
    November 3, 2010

    राजा हमेशा प्रजा के लिए अबूझ पहेली हुआ करता है। मौजूदा दौर में असल राजा रुपया ही है, जिसे चाहे जब चाहे अपने मन मुताबिक नाच नचवाता है।

prashant singh के द्वारा
November 2, 2010

madan ji aapke is lekh se ek baat to saaf hai ki rahul bhaiya wakai mein gajab hain, aur unse gajab hai woh samosewala……zindgi bhar apna rupaya dhundta rahega

    madan mohan singh के द्वारा
    November 3, 2010

     @prashant singh–यह रुपया ही तो है जिसे जिंदगी भर ढूढना पडता है।

akhilesh kumar rai के द्वारा
November 2, 2010

rahul bhaiya ka to pata nahin, ki woh kya karna chahtey hain,woh yeh sab desh ki unnati ke liye kar rahe haikn ya apni publicity ke liye, yeh to gahdhi pariwaar he jaane ya phir congress party…… lekin us garib ka woh ek rupya kahan gaya yeh ek bada sawal hai….

    madan mohan singh के द्वारा
    November 3, 2010

    akhilesh-ये पब्लिक है सब जानती है। पब्लिसिटी स्‍टंट भी और एक रुपये का राज भी।

    Latrice के द्वारा
    July 12, 2016

    It can be wetrdt-gelaieh, although I know some very thin people who snore a lot. About ways to stop it, I suggest not being tired in general, and there are some devices at the pharmacy (some sort of nose clips), but I don’t know if they work. A healthy diet will also help your breath. And don’t smoke.

kmmishra के द्वारा
November 2, 2010

प्रिय मदन मोहन  जी सादर वंदेमातरम ! आपको व आपके परिवार को धनतेरस और दीपावली की शुभ कामनाएं । मिठाईयों से दूर रहियेगा और पटाखे थोड़ी दूरी से फोड़ियेगा । आभार ।

    madan mohan singh के द्वारा
    November 3, 2010

    kmmishra जी, पटाखा फोडता नही, मिठाई छोडता नहीं। धनतेरस और दीपावली की आपको बधाई।

Harish के द्वारा
November 2, 2010

बहुत अच्छा लेख, बधाई.

    Lottie के द्वारा
    July 12, 2016

    Well thank you Jan, I appreciate the support!Delilah here Jan, let me tell you that woman does NOT ࣨpoof.” If she was any louder, the neighbors would think she was setting off fireworks.

preetam thakur के द्वारा
November 2, 2010

जब १९७७ से १९८० तक के अरसे में ही तीन तीन प्रधान मंत्री दुसरे खानदानों से बने थे तो ५२ टन सोना गिरवी रख कर देश को शर्मिंदा किसनें किया था | असल में कुछ लोगों की जुबान लम्बी और दिमाग छोटा होता है वोह logic रखते ही नहीं इस्तेमाल कहाँ से करेंगे | जब लोग मसखरों को ही पसंद करते हैं तो मसखरी करके अगर देश को एक स्थिर और मजबूत सरकार दी जा सके तो इसमें बुरा क्या है ? जो लोग घोटाले कर रहे हैं उनको जनता नें ही चुन कर अपना प्यारा मुख्या मंत्री बनाया है | इसमें राहुल के खानदान की गलती कहाँ से आयी ?

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 2, 2010

    preetam thakur जी, बात यहां राहुल जी की हुई है, उनके खानदान की नहीं। सवाल राहुल जी की कवायदों के नतीजे को लेकर है। शुक्रिया।

    dinesh sharma के द्वारा
    January 25, 2011

    प्रीतम जी, आप जैसे चाटुकारों से ही राहुल और कांग्रेस जैसे संदिग्ध तरक्की की राह पर हैं.

MANOJ SINGH के द्वारा
November 2, 2010

I LIKE IT

amartya के द्वारा
November 2, 2010

BAHUT BHADIA

shivprasadsingh के द्वारा
November 1, 2010

rupaya mila ki nahin. rajeev ji ne to kaha tha ki ek rupaye ka 14 paise hi logon tak pahunch pata. aj ki sthiti pata kijiye.

R K KHURANA के द्वारा
November 1, 2010

प्रिय मदन जी, राजनीती भी आजकल दुकानदारी बन गयी है ! जैसे व्यापार को बढ़ाने के लिए विज्ञापन करना पड़ता है उसी प्रकार राजनीती में ऊपर उठने के लिए भी विज्ञापन करना पड़ता है १ यह रेलगाड़ी का सफर भी तो विज्ञापन का एक तरीका ही तो है ! इसमें किसी को कोइ एतराज नहीं होना चाहिए ! बहुत सुंदर व्यंग ! मेरी बधाई राम कृष्ण खुराना

hakurami के द्वारा
November 1, 2010

सब बकवास है कुछ नया लिखो भाई

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    हाहाहाहहाहाहाहाहा

    Mitchell के द्वारा
    July 12, 2016

    I am commenting to let you understand what a impressive encounter my wife’s child had reading your blog. She mastered many details, including how it is like to have a marvelous teaching mood to make men and women very easily comprehend selected hard to do subject areas. You truly exceeded our own exitstaeponc. Thank you for presenting such effective, trusted, revealing and in addition unique tips about your topic to Gloria.

आर.एन. शाही के द्वारा
November 1, 2010

सिंह साहब आपने भी गज्ज्ज्ज्ज्जब लिखा । और इस आखिरी एक रुपए ने तो घनचक्कर ही बना दिया । देखते हैं राहुल बाबा सचमुच के प्रधानमंत्री बनने के बाद किस-किस ट्रेन की सवारी करते हैं, और कहां-कहां समोसा-जलेबी खाते हैं । धांसू पोस्ट के लिये बधाइयां ।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    शाही जी, रुपये के चक्‍कर में तो पूरी दुनिया घनचक्‍कर बनी हुई है। रही बात राहुल जी के समोसो और जलेबी की तो यह सिर्फ प्रधानमंत्री बनने के लिए है। प्रधानमंत्री बनने के बाद के लिए नहीं।

KMMishra के द्वारा
November 1, 2010

सत्य वचन कहा आपने । सचाई यही थी लेकिन मंत्रमुग्ध मीडिया ने उनका सफर गोरखपुर से मुंबई वीटी तक करा दिया । यह कैसे संभव है कि नेहरू गांधी परिवार का उगता सूर्य 36 घंटे तक रेल के जनरल कंपार्टमेंट में सफर करे और इस देश में भूचाल न आये । . सोनिया गांधी तो सुपर प्रधानमंत्री हैं, राहुल बाबा सुपरडुपर प्रधानमंत्री हैं । राजमाता सोनिया के कहे पर भले एक बार यूपीए सरकार कान में तेल डाल ले पर राहुल बाबा के वचन ब्रह्मवाक्य हैं । उनके मुंह से शब्द निकले नहीं कि पूरा मंत्रीमण्डल उनकी चाकरी में लग जाता है । सिद्धपुरूषों की यही निशानी है । फिलहाल तो राहुल बाबा यूपी के विश्वविद्यालयों से शिक्षा की अर्थी उठाने के लिये कपिल सिब्बल से मिल आये हैं । लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें राहुल बाबा से ऊपर थोड़े ही हैं । यूपी के विश्वविद्यालयों में और केन्द्र विश्वविद्यालयों में 45, 50,55 और 60 साल की उम्र के छात्र नेता फिर से नेतागिरी करके शिक्षा छोड़ बाकी सबका उत्थान किया करें इसलिये राहुल बाबा कपिल सिब्बल से मिल आयें हैं । उनका कहा तो सिब्बल के पिता जी भी नहीं काट सकते हैं चाहे यूपी के हर विश्वविद्यालय में शिक्षा की जगह रोज जिंदाबाद, मुर्दाबाद हो, प्रोफेसरों की ऐसी तैसी हो । . मदन मोहन को कृष्ण मोहन का नमस्कार

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    @ KMMishra—आप कृष्‍ण मोहन हैं इसलिए मदन मोहन से श्रेष्‍ठ हैं। वजह यह कि जिस पर मदन यानी कामदेव भी मोहित हो जाए वह कृष्‍ण होते हैं और जिस पर कृष्‍ण भी मोहित हो जाएं वे सर्वश्रेष्‍ठ होते हैं। आपको सादर प्रणाम।

Abhishek Awasthi के द्वारा
November 1, 2010

प्रिय मदन जी, नमस्कार अति साभार आपका इतना सुन्दर लेख लिखने के लिए| वैसे सबके सामने ये १ रूपया का घोटाला जाहिर हो गया है तो मेरी रिपोर्ट की जरूरत नहीं| जय श्री राम – जय भारत- जय हिंद

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    @Abhishek Awasthi—घोटाला एक रुपये का हो या एक करोड़ की। घोटाला तो घोटाला ही होता है।

    Honney के द्वारा
    July 12, 2016

    Its sure seems like they go out there and target star players/ guys who are playing exeticponally well, doesnt it? Brown easily could of been knocked out of the game or series after that hit.

saroj के द्वारा
November 1, 2010

राहुल एक अवसरवादी नेता हैं , राहुल गांधी के व्यक्तित्व की विशेषता है नीतिविहीन आतंकवाद-उग्रवाद-साम्प्रदायिकता या पृथकतावाद को अवसरवादी राजनीति का मोहरा बनाकर इस्तेमाल करने की कांग्रेस की परंपरा रही है। उसका खामियाजा आज सारा देश भुगत रहा है। कांग्रेस ने कभी भी उग्रवाद-आतंकवाद -साम्प्रदायिकता या पृथकतावाद के खिलाफ दो टूक रवैय्या नहीं अपनाया है। इन राजनीतिक प्रवृत्तियों के प्रति कांग्रेस का सॉफ्ट रूख देश में सामाजिक विभाजन का काम करता रहा है और इससे इन विभाजनकारी ताकतों को बल मिला है,वैधता मिली है खैर ये तो हुई उनकी बात अब आपकी लेखन शैली की ओर रुख करें तो उसमे कोई खामी निकलना वाजिब ना होगा हमेशा की तरह बेहद उम्दा लेख है … रही बात १ रूपए की तो …….देश की राजनीती की तरह उन्सुल्झा हुआ ही है इतना सोचने के बाद भी सो मैंने सोचा १ रूपए के लिए कोन इतनी माथा पची करे ……उन्सुल्झा ही रहने दिया जाय …….. कुल मिलाकर सटीक व राहनीय लेख

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    @saroj –ये एक रूपया बडा परेशान करता है। सरकार जब बजट पेश करती है तब भी यही मगजमारी करती है कि एक रुपये में कितने पैसे कहां से आएंगे और कितने पैसे कहां जाएंगे। जय हो।

    Lettice के द्वारा
    July 12, 2016

    The puhscares I make are entirely based on these articles.

Munish के द्वारा
November 1, 2010

आदरणीय मदनमोहन जी, वास्तव में राहुल एक अवसरवादी नेता से कम नहीं हैं, जब महाराष्ट्र में चुनाव होते हैं, तो बिहारियों और उत्तर भारतियों के खिलाफ एम् एन एस के गुंडों ने आतंक मचाया हुआ था और मार मार कर भगा रहे थे, परन्तु राहुल एक शब्द बिहारियों के समर्थन में और एम् एन एस के खिलाफ एक शब्द नहीं बोले, लेकिन बिहार में चुनाव आते ही वो बोलते हैं मुंबई पर सबका अधिकार है. …….. कश्मीर मुद्दे पर वो जवाब नहीं देते वो कहते हैं ये प्रधानमंत्री जी का विषय है परन्तु उमर अब्दुल्ला के साथ गलबहिया करने स्वयं पहुच जाते हैं, रही युवराज होने की बात ये सबसे बड़े लोकतंत्र में सबसे बड़ी राजनितिक पार्टी जो लोकतंत्र की स्थापना का ढकोसला करती है में राजशाही की बातें कैसे क्या लोकतंत्र सिर्फ जनता के लिए है राहुल जैसों के लिए नहीं. अब बात आपके एक रूपये की, तो आप वो २ रुपये न जोडें जो २४ रूपये में शामिल हैं आप ७२ रूपये में वो तीन रूपये जोडें जो ७५ रूपये में से वापस मिले हैं.

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    Munish जी, अच्‍छा याद दिलाया आपने बिहार के लोगों के बारे में भी मुझे ब्‍लाग में जिक्र करना चाहिए था। राज ठाकरे को यही लोग तो प्रमोट कर रहे हैं। जगजाहिर बात है। इतनी बार पूरबियों पर ज्‍यादती हुई। मनसे ने जानलेवा हमला किए। लेकिन कांग्रेस की सरकार है कि खामोशी अख्तियार किए रही। राष्‍ट्रीयता की परिभाषा को तार तार करने वाले मनसे प्रमुख पर क्‍या राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून नहीं लगना चाहिए। एक बार भी ऐसी कार्रवाई नहीं हुईराज ठाकरे के खिलाफ कि उनको सबक मिले।

    Xannon के द्वारा
    July 12, 2016

    Me, too. I was not as close as you. I was in the village, about a mile away, watching the towers fall. I lived in NYC for nine years. It was hard, probably the hardest time in my life. I, too, was a super overvachie-er. I moved home to Ohio last year. I am so much happier. I still struggle with wanting to follow my dream career, to not give up that dream, versus pursuing what opportunities open up before me. I will never really understand why fate brought me so close to the WTC on that day, but, to your point ( I think), We have to accept where life takes us, even if it is not what we planned.

Montu के द्वारा
November 1, 2010

वाह भैया वाह बहुत बढ़िया लेख… काफी दिन से देख रहे हैं देश कि जनता इनका नौटंकी कभी मुंबई लोकल ट्रेन तो कभी कुछ और कभी नलका पर नहाते हुए इस तरह से अगर देखा जाये त इनका राजनीती के पाराग्राफ लालू जी जैसा ही उठा है शुरवात में ओ भी कभी स्कूल तो कभी किसी टोला पर पहुँच जाते थे, पर उसके पीछे के मनसा और आज के इनके पीछे के बह्वाना में कुछ अंतर हो ऐसा नहीं दीखता… बहुत सुन्दर रचना काश कि उनके ऊपर भी कुछ असर होता वैसे भी नौटंकी मास्टर लोग को कम ही फिक्र होती जनता कि…

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    नौटंकी सबसे बेअसर होती है मोंटूजी।

anshu के द्वारा
November 1, 2010

ghatiya and 2 kaudi ke lekh hai ye..

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    अंशुजी, आपके विचार सिर माथे। शुक्रिया।

    anshu के द्वारा
    November 1, 2010

    bhavnao ko dhens pahunchane ke liye maafi chahunga..

    Kaden के द्वारा
    July 12, 2016

    « Pas besoin de faire un dessin pour imaginer la tâche respective qui revient à chacun .&p&qn;brasuo;Certaines redondances ne sont pas plus utiles, je pense.

SUNEEL PATHAK के द्वारा
November 1, 2010

वाह सर आनंद आ गया बिलकुल सटीक लिखा आपने

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    सुनील पाठक जी-आनंद ही तो जीवन का परम सुख है। अगर वाकई आनंद आया तो मेरा लिखना सार्थक हुआ। जय हो।

    Bella के द्वारा
    July 12, 2016

    Racist Whore,my cunt is throbbing like a wr€™eltrâess heartbeat right now thinking about you and I slipping into satin sheets (if only in our minds) and turning the place into a lake of our pussy juices. I feel like I’m on LSD just imagining this. fuck I’m gonna die.

अरुण अग्रवाल के द्वारा
November 1, 2010

भाई मदन मोहन जी क्या लिखते हो भाया ,आनंद आ गया | बिहार के चुनाव का समय है , युवराज जी को ऐसे नाटक तो करने ही पड़ते है | अब कोई रोज़ रोज़ ट्रेन में जाना नहीं न है | चलो इस बहाने युवराज जी ने ट्रेन ही देख ली | और हमारी ट्रेन भी पवित्र हो गयी |और एक फायदा ये की अब कुछ दिनों तक , ट्रेन में लोगो को बात चीत करने के लिए एक और बड़ा विषय मिल गया | अरुण अग्रवाल

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

     @अरुण अग्रवाल—-बिहार में चुनाव हो और नौटंकी ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। अगर नौटंकी पर पाबंदी लगा दी जाए तो लालूजी को चुनाव प्रचार के लिए कोई टॉपिक ही नहीं मिल पाएगा।

vatsala tiwari के द्वारा
November 1, 2010

very good

    Hank के द्वारा
    July 12, 2016

    I love this idea. I have a great grdahanugdter that is 4.pi. She lives quite a distance away. She is with her mom part time and dad part time. I’ ll make some of these for her memory box so she will h ave something to hold on to—I hope. Thanks, Audrey

Suresh Chandra के द्वारा
November 1, 2010

राजीव जी कह्ते थे, रुप्या चलता है तो घिसता है… आज के ज़माने मे तो गायब ही दिखने लगा… सवाल हल करने वाले भी चुप ही रहने के गणित मे विश्वास करने लग गये… फिर से एक बार आपकी लेखनी का जादू मुझपर सम्मोहन कर गया है… बधाई एवम आभार… सुरेश…

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    @Suresh Chandra–सही मायने में तो रुपया चलता है तभी बढ़ता है। रुपया नहीं चलेगा तो अर्थ व्‍यवस्‍था ठहर जाएगी। अर्थ व्‍यवस्‍था ठहर जाएगी तो हम ठहर जाएंगें। अगर हम ठहर गए तो सत्‍ता की बागडोर किसी और हाथ में देना ही आखिरी विकल्‍प होगा।

कुणाल देव के द्वारा
November 1, 2010

का बात है। छा गए भाईजी।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    कुणाल, अगर हम छा गए हैं तो कहीं  ना कहीं श्रेय आपको भी जाता है। शुक्रिया।

चिंदी चोर खबरची के द्वारा
November 1, 2010

प्रिय मदन, जहां पूरी व्‍यवस्‍था ही आज लापता तलाश का सरमाया हो गई है, वहां यह नजारा ही अगरचे दिखता है तो भी गलत नहीं। अपनी तो उम्‍मीद है सूधरेंगे हालात खरामा खरामा , आओ साथ में आप भी अगर यह दूआ करो तो शायद जल्‍द असर हो।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    @चिंदी चोर खबरची–भइया आपकी दुआ असर दिखाए, यही मेरी भी दुआ है।

abhishek raj के द्वारा
November 1, 2010

rahul ji ko delhi t patna jane ka sujhav sahi hai bhai sahab. nam ke sath kam bhi dikhana hai to rahul ko ab is purane dal me naya tadka marna padega.

skand shukla के द्वारा
November 1, 2010

जाहिर सी बात है ये राहुल गाँधी अपना भविष्य सुनिचित करने के लिए कर रहे हैं .. लेकिन इसे निरा उनका प्रोपोगंडा नहीं कहा जा सकता .. राहुल ने भारतीय राजनीती की दशा और दिशा दोनों को प्रभावित किया है इस बात को नाकारा भी नहीं जा सकता है .. आलेख पढ़कर काफी मजा आया .. अपेक्षा है आगे भी ऐसे पोस्ट पढने को मिलते रहेंगे ..

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    @skand shukla-मेरी भी ईश्‍वर से यही प्रार्थना है, राहुल भइया भारतीय राजनीति को सही दशा-दिशा दें। शुक्रिया।

    Justus के द्वारा
    July 12, 2016

    My brother recommended I would possibly like this blog. He was once totally right. This submit actually made my day. You ca1;7#82n&nt believe just how much time I had spent for this information! Thank you!

hirdesh के द्वारा
October 31, 2010

सच तो यह है की राहुल बाबा की एक्स्पिरे डेट भी क्रोस होती जा रही है. सोनिया ने टाइम पर हाथ पीले नहीं किये घर पर रुके भी तो किसके लिए. जब भी खाली होते है निकल लेते है.

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    राहुल भइया को पीएम पहले बनना है, पति बाद में।

    Travon के द्वारा
    July 12, 2016

    probabil nu È™tia că le am :) @Eva: dacă o să mai fie astfel de cereri, promit că o să pun un buton din ăla. O să-i transmit lui E. ce ai spus de design, că el rÄsozunpătƒr pentru asta :D

spsingh के द्वारा
October 31, 2010

हाई टेक पोलिटिक्स है भाई, हिसाब किताब में उलझाने की बजाय मुंगरी लाल की तरह सपने देखिये दस साल आगे की पोलिटिक्स कैसी होगी.

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    October 31, 2010

    राजनीति कभी हाईटेक-लोटेक नहीं हुआ करती। हमेशा समसा‍मयिक होती है, वक्‍त की नब्‍जचाल हुआ करती है। वक्‍त की नब्‍ज न पहचानने वाले अजीर्णता का शिकार हो जाते हैं।

anurag pandey के द्वारा
October 31, 2010

कश्मीर चला जाय तो चला जाय, अफजल गुरु को फांसी हो न हो, अशोक चव्हाण घोटाले करते रहें, खेल में ‘खेल’ हो…..पर कोई बात नहीं राहुल भैया सारे पाप धुल देंगे. ये उनका स्टाइल है…

    Lily के द्वारा
    July 12, 2016

    The election being over will be good for the enomnvniert, too. I don’t even want to guess how many trees have been slain to fill my frakking mailbox with bullshit.Six more days…

mrityunjay के द्वारा
October 31, 2010

ye ek rupya to pata nahi mab se anbhujh paheli bana hua hai…

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    रुपये की पहेली भी अजब पहेली है मृत्‍युंजय जी। इतनी जल्‍दी नहीं सुलझती।

Sadhvi Chidarpita के द्वारा
October 31, 2010

ये सब करके राहुल अपनी नादानी का ढिंढोरा पीटते हैं या गरीबों की गरीबी का मजाक उड़ाते हैं, मैं कभी समझ नहीं पायी. सटीक व्यंग. आपको एक फिर अच्छे लेख के लिए बहुत-बहुत बधाई.

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    साध्‍वी जी, सादर प्रणाम। गरीब सब कुछ बरदाश्‍त कर सकता है, अपनी गरीबी का मजाक नहीं। गरीब जब मजाक उडाता है तो कुर्सी हिलती नजर आती है। हिल भी जाती है।

    Trish के द्वारा
    July 12, 2016

    Heckuva good job. I sure apceiprate it.

गोपाल कृष्ण शुक्ल के द्वारा
October 31, 2010

सुर्खियों मे बने रहने के नुस्खे बताने के लिये गांधी खानदान मे कई सेवक होंगे। उन्ही मे से किसी का भाग्य खुल गया है राहुल गांधी को नये-नये नुस्खे सुझाने कि लिये। वैसे भी भारत की जनता की नरमदिली ये खानदान बखूबी जानता है। जवाहर लाल नेहरू से ले कर आज राहुल गांधी तक उन्ही नुस्खों को इस्तेमाल कर रहे है जिनसे जनता को बेवकूफ़ बना सकें। भारत का दुर्भाग्य है कि इस भ्रष्ट खानदान का जन्म भारत जैसी पावन धरती पर हुआ। तरस नादान जनता पर भी आता है जो जानते-बूझते हुए खानदानी नाटक को देखती जा रही है और सहती जा रही है। —— जागो जनता जागो——

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    शुक्‍ला जी, जनता जागेगी। जरूर जागेगी। मगर धीरे-धीरे, जरा वक्‍त लगेगा।

    dinesh sharma के द्वारा
    January 25, 2011

    शुक्ल जी, बिल्कुल सही कहा आपने

Rajnish kumar singh के द्वारा
October 31, 2010

hoबहुत सही कहा आपने भैया यदि उन्हें जनता ka इतना ही khyal hain to उन्हें डेल्ही से patna वाली ट्रेन ,में सफ़र करना चाहिए…. तब अच्छा समझ में आएगा क्या होता हैं सफ़र और दुःख दर्द…. ये सब दिखावा हैं भैया…. अब सवाल रहा आपके सवाल ka तो इसमें पैसा खोया कहाँ हैं सबने २४-२४ दिया यानि की ७२ रुपया दिया जिसमे से ७० रुपया दुकानदार के पास हैं और 2 रुपया नौकर के पास…….

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    Rajnish जी, दिल्‍ली-पटना की ट्रेनों में सफर वाकई दर्द का दूसरा नाम होता है। जो जाता है वही जानता है।  खासकर दिवाली, छठ और होली के दिनों में।

    Lucinda के द्वारा
    July 12, 2016

    Mmg dia tak pki inai ekk.. tapi ok jer la.. inai tu bkn wajib pon.. yg wajib.. NIKAH.. aliaadulhllmh.. sgt2 simple n sweet.. takyah beriya.. yg penting.. NIKAH PAKAI TUDUNG!!! bagus sesgt… tak cam retis lain… :P Well-loved.

नवीन भोजपुरिया के द्वारा
October 31, 2010

भईया प्रणाम सबसे बडी दिक्कत यही है कि राहुल करता है । और मिडिया को बासी तिरासी खबर को नया कर के छापना पडता है । अब देखिये न , गोरखपुर से वो रात मे 18 / 19 तारीख को ट्रेन मे सफर करता है लेकिन मिडिया को पता चलता है एक हफ्ते बाद और यु पी की खुफिया पुलिस को मिडिया से पता चलता है कि राहुल गाँधी आये भी थे । समोसा को ही देखिये , जब तक लालु आलु और समोसा बिहार चल रहा था तब बच्चा बच्चा जान गया था समोसा को , लेकिन राहुल ने खाया तो ….. खैर होता है । अब आगे देखिये और जरा इस बात को सोचिये । भारत के सारे नेता जगह जगह पे समोसा खा रहे है । भारत के सारे नेता स्लीपर क्लास मे सफर करने लगे । भारत के सारे नेता कलावती जैसो के घरो तक जाने लगे । भारत के सारे नेता आम आदमी तक पहुंचने लगे । तो इस से मनोबल किसका बढेगा ? एक जगह हमने देखा कि एक औरत छईंटी मे माटी लेकर जा रही है और नंगे पैर है और पीछे पीछे राहुल गान्धी प्लासटिक के छईंटी मे आधा माटी भरा और जुता पहन के जा रहे है , तो लोगो ने तीर का निशान लगा के मजे ले ले के राहुल को गरियाया लेकिन विश्वास किजिये गरियाने वाले वो लोग थे जो अपनी जिन्दगी मे कभी मिट्टी नही उठाये होंगे , जो बिना जुता चप्पल के टायलेट भी नही करते होंगे फिर राहुल पे ऐसी बात क्यो ? राहुल तो चान्दी का नही सोने का चम्मच ले के पैदा हुआ लेकिन जो बिना चम्मच के पैदा हुए है वो ऐसे क्यो ? चलिये ये भी चलता है , अरे भाई कोई तो होना चाहिये जिसे फोकट मे सुनाया जाय कहा जाय । वैसे आप भी राहुल के जादु से बच नही पाये और ये ब्लाग लिखना ही पडा है । बस जैसे आप लिखे है वैसे बाकी भी लिखते है और ये सिलसिला चलता रहता है । लिखा काफी अच्छा है । बधाई है !

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    नवीन जी, मैं राहुल  भइया के जादू से बचा ही हुआ हूं। मेरा ब्‍लाग उनके जादू का असर नहीं, उनके जादू से बाहर लाने की कोशिश है। जय हो।

    नवीन भोजपुरिया के द्वारा
    November 1, 2010

    भईया कुछ भी हो लेकिन आज के समय मे मिडिया और लेखक दो समुह मे बटे है । 1- प्रो राहुल 2- एंटी राहुल इसके अलावा तीसरा कोई ग्रुप नही है । एक बन्दा अपना नाश्ता पुरे भारत मे साथ लेकर घुमता है और वो न्युज भी बनता है लेकिन उसको हवा इस लिये नही दी जाती है क्योकि हवा देने वाली की हवा निकाल दी जाती है । खैर चलता है ।

    Brijesh के द्वारा
    November 4, 2010

    राहुल के जादू से बचाने व उसे चलाने वाले हम आप कौन होते हैं। वो गाना सुना है , पल भर के लिए कोई मुझे प्यार कर ले, झूठा ही सही……….राहुल अगर सच्चे नहीं भी हैं तो उनका ढकोसला दूसरे राजनेताओं जैसा खतरनाक भी नहीं है। 

    Buff के द्वारा
    July 12, 2016

    Extraordinaire ! On dirait du Wiaz !Toutefois… Je soutiens également le pinaillage de Clément. On corrige bien les fautes d&rasuo;orthogrspheq, alors pourquoi pas celles de logique ? Allez Martin… Siouplé…

sdvajpayee के द्वारा
October 31, 2010

 यही तो  \’छवि बनाओ प्रबंधन\’ का कमाल है।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    वाजपेयी जी, प्रबंधन की शिक्षा में जल्‍द ही छवि बनाओ प्रबंधन का भी कोर्स शामिल होने वाला है, ऐसा लगने लगा है।

    Jaclyn के द्वारा
    July 12, 2016

    to me, “ask yourself what it is that you feel inside when you think about this is82e.&#s2u1; I was sort of annoyed with her, then I realized that my annoyance was probably signaling something that rang true. So, I gave it some thought and I let myself experienced my feelings fully when I thought about the issue. I realized it was that I thought I was good enough. And that gave me the courage to tackle the issue. Because that feeling is that old feeling, and it’s just hanging around out of habit, sometimes when I tackle something new. So thanks for the reminder!

dinesh mishra के द्वारा
October 31, 2010

सर, प्रणाम। आपका यह ब्‍लॉग पढा। पढकर जेहन में यह सवाल कौंधा कि राहुल गांधी की यात्रा कैसे इस देश में खबर बन जाती है जबकि आम आदमी का सफर कितना मुश्किलों भरा होता है, इस तरफ किसी का भी ध्‍यान नहीं जाता है। और तो और इस पर ब्‍लॉग भी लिखा जा रहा है। समाजशास्‍त्रीय विवेचन हो रहा है। आपके ब्‍लॉग की सबसे खास बात यह लगी कि इसमें इस्‍तेमाल किए गए थोडे से देशज शब्‍दों का प्रयोग जिनकी वजह से मजा आ गया। आपके अगले ब्‍लॉग के इंतजार में जिनमें थोडा सा गवंई पुट हो और माटी की महक भी।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    दिनेश मिश्रजी, आपनी माटी और अपनी बोली से जुदा होकर आदमी अपनी पहचान खो देता है। सिलसिला जारी रहेगा अगले ब्‍लॉग में भी जल्‍द।

    Lucy के द्वारा
    July 12, 2016

    Toivottavasti meni hyvin ne pääsykokeet! Mulla on vasta ens torstaina. En kyllä jaksa siitä stressata, se alttoviulututkinto jännittää paljon enemmän..Mäkin pidin tosta Sisnuuelämää-elokkvakta, enkä ole sarjaa katsonut. Toivoisin myös, että kakkonen olisi yhtä hauskaa ja leppoista katsottavaa. :D On kyllä niin mälsää jos lauantaina sataa. Oon nimittäin suunnitellut yo-kuvani otettavaksi ulkona tossa meidän pikkumajakalla, ja silloin täytyy olla hyvä ilma!!!

shahsank के द्वारा
October 31, 2010

राहुल जी जो v kar rhe hai..achha kar rhe hai,,.. aapne jo v likha hai…mai usse sahmat n hi hoo

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    शशांक, सहमति-असहमति एक सिक्‍के के दो पहलू हैं। चलेगा।

Shahnawaz के द्वारा
October 31, 2010

सवाल राहुल गाँधी के समोसा खाने का नहीं है, न उसके लोकल ट्रेन में चलने का है. सवाल है की आखिर राहुल गाँधी ऐसा क्यूँ कर रहे हैं? क्या वह लोगों को मुर्ख बना रहे हैं या सच में उनके मन में कुछ अच्छा करने की इच्छा है. राहुल गाँधी अमेठी के संसद है एवं कांग्रेस पार्टी ने उनको युवा कांग्रेस और NSUI का प्रभार दिया है. राहुल गाँधी ने दोनों ही जगह संगठनों में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की स्थापना की है. यदि वह व्यक्ति देश में किसी गरीब के घर चला जाता है तो हमें उसपे आपत्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें खुस होना चाहिए की चंडी की चम्मच लेकर पैदा हुआ व्यक्ति वास्तविकता जानना चाहता है. उनके इरादे मुझे नेक लगते हैं भले ही उनके राजनीतिक विरोधियों को यह पाखंड लगे.

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    Shahnawaz साहब। राहुल भइया ने लोकल में, मेट्रो में, स्‍लीपर में सफर किया, ठीक क्‍या। लेकिन उसके बाद क्‍या किया। अपने सफर के आकलन के बाद उन्‍होंने जनता की दुश्‍वारियां दूर करने के लिए क्‍या किया। हो सके तो जवाब दीजिएगा।

    Margaretta के द्वारा
    July 12, 2016

    You have done a great job on this article. It’s very readable and highly intelligent. You have even managed to make it undbdstanraele and easy to read. You have some real writing talent. Thank you.

vishal gupta के द्वारा
October 31, 2010

भैया मदन जी इस रुपये की खोज के लिए जाँच आयोग गठित करेंगे अपने राहुल भैया.

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    विशाल, कहां हो भाई। कुछ खबर नहीं मिलते पुराने साथियों की। रही बात जांच आयोग की तो, अपने यहां कभी क्‍या कोई जांच आयोग वक्‍त पर सही नतीजे पर पहुंच पाया है ?

    vishal gupta के द्वारा
    November 3, 2010

    भैया धनतेरस एवं दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं. मैं बरेली में ही हूँ. और अजमेरा इंस्टिट्यूट को ही देख रहा हूँ. जल्दी ही बरेली का एक न्यूज़ पोर्टल http://www.bareillylive.com शुरू करने जा रहा हूँ.

    Jetson के द्वारा
    July 12, 2016

    Se agcarede que dejéis claro que la idea no es vuestra y que tratéis de que los que tenemos todos vuestros discos podamos tener el material inédito aparte.

vipul chaturvedi के द्वारा
October 31, 2010

सर जी जैसे हर फ‍िल्‍म का रीमेक हिट नहीं होता, वैसे ही राजनीति करने के लिए मंच्‍ा पर खडे होकर रोज रोज के भाषण अब बखूबी काम नहीं करते। जनता की वोट रूपी सहानभूति पाने के लिए कुछ तो अलग करना ही पडेगा और फ‍िर राहुल भइया युवराज जो ठहरे। इनका तो अंदाज ही निराला है और गुरु (ज्‍योतिषी) ने कहा होगा बेटा तेरा वक्‍त बदलने वाला है। रही बात राहुल भइया, मिलीबैंड और बिलगेट्स के बिल की तो अपनी अंटी में रुपये छुपा लो और भोली जनता को दिखा दो कि हमने भी बिल दिया, यह गणित हमारे नेताओं का ही इजाद किया हुआ है। दुकानदार को दिए गए 70 रुपये में प्रत्‍येक को करीब 23: 33 रुपये ही देने पडे न कि 24। बाकी पैसे ::::::::: आआहहाहा ढूढते रह जाओगे।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    विपुल, आपने तो ढूढ़ ही लिया। धन्‍यवाद

    Jeanne के द्वारा
    July 12, 2016

    I found your blog website on google and verify just a few of your early posts. Proceed to keep up the superb operate. I simply additional up your RSS feed to my MSN Information Reader. In search of forward to studying more from you afrarwetd!…

unknown के द्वारा
October 31, 2010

गणित के सवाल को गणित की तरह ही पेश करना और हल करना चाहिए, दर्शनशास्‍त्र की तरह पेश करके बुद्धिजीवी नहीं बनना चाहिए। आपके सवाल का जवाब यह है दुकानदार ने 70 रुपए काटे। 2 रुपए वेटर ने जेब में रखे और एक-एक रुपया तीनों महानुभावों को लौटा दिया गया। इस तरह जोडें तो आपका जो एक रुपया खो गया था, वापस मिल जाएगा।

    madan mohan singh,jagran के द्वारा
    October 31, 2010

    आदरणीय unknown जी, नमस्‍कार। लगता है सवाल हल करते-करते आपको सिरदर्द की गोली खानी पड़ गई है। आपके कमेंट से कुछ ऐसा ही लग रहा है। बहरहाल आपसे ठीक बाद श्री विपुल चतुर्वेदी ने जो जवाब लिखा है, उसको पढ़ लीजिए। सवाल का हल शामिल हैं। वैसे यह किसी दर्शनशास्‍त्र का नहीं, विशुद्ध गणित का ही सवाल था। कमेंट के लिए शुक्रिया।

    Jasemin के द्वारा
    July 12, 2016

    Essays like this are so important to brdineoang people’s horizons.

kishor jha के द्वारा
October 31, 2010

लाजवाब। पढ़कर मजा गया। सच्चाई से अवगत कराती यह रपट विचारोत्तेजक भी है। लोगों को राजनेताओं का असली खेल समझना चाहिए और तदनुसार निर्णय लेना चाहिए।

    Budd के द्वारा
    July 12, 2016

    · proprio grazie al2tl8#17;intervis&a su apogeonline ho scoperto il tuo blog e la tua attività su intruders.tv che ho prontamente visitato. Ti faccio un grande “in becco all’upupa”, seguirò le tue video-interviste ed il blog con interesse. ;-)

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 31, 2010

आदरनीय सिंह साहब,इस लेख के साथ ऐसा लग रहा था की युवराज जी के साथ हम लोग भी सफ़र में है,यानि आपने उनके साथ बैठे बैठे ही यात्रा कराया,धन्यवाद! लेकिन एक रुपया आखिर गया कहा ये तो बता ही दीजिये सर!

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    धर्मेश जी, रुपया जहां से आता है घूम फिर कर वहीं जाता है।

    Steffi के द्वारा
    July 12, 2016

    The least repulsive set of that “pro combat” nonsense yet. At least the wearers will look like football players, not power rangers or something out of &#lR20;2ollerba8l”.

राजू मिश्र के द्वारा
October 31, 2010

बढि़या है मदन बाबू….लेकिन एक रुपया कहां गया ? जय हो।

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    प्रति व्‍यक्ति तैतीस पैसे से तनिक ही ज्‍यादे का घपला है दद्दू। बाकी सब ठीक है।

    Sherlyn के द्वारा
    July 12, 2016

    I guess finding useful, reliable initrmaofon on the internet isn’t hopeless after all.

S D Tiwari के द्वारा
October 31, 2010

Never think that Rahul Ji will become PM. Soniya Ji is very clever like her mother in law. She has the plan ready to make Priyanka the next Prime Minister. Kaise? ye to samay bataayega.

    मदन मोहन सिंह के द्वारा
    November 1, 2010

    श्रीएसडी तिवारी जी, अगले मनमोहन सिंह का कार्यकाल पूरा होने से पहले राहुल प्रधानमंत्री बन जाएंगे। ऐसा मेरा आकलन है। बाकी तो सब वक्‍त के हाथ में है ही।

    Kalea के द्वारा
    July 12, 2016

    Holy shzniit, this is so cool thank you.

ravi buley के द्वारा
October 31, 2010

बहुतै बढ़िया भैया…

    maheshsharma के द्वारा
    November 2, 2010

    बहुत अच्छा िलख रहे हैं मदन जी, आपको लख-लख बधाई।


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